अनुरागक डोर (गजल)


मोहिनी छै अनुरागक डोर अँहु त तनिते हायब
दुरी सँ दुर दु मीत सही मोन सँ त मानिते हायब

मेसेज नहि हमरा नहि एक कल फोन सही
घरीघरी खोलि मोबाइल अँहु त देखिते हायब

हमर नयनक नोरके गेरुवाक सिनेह भेटल
सुतल नहि हम सही अँहु त जगिते हायब

भगेल कमी कसर हमरा स मानिरहल छी हम
बितल बात भुलि जायब अँहु त सोचिते हायब

प्रीतक पुकार सुनिक हियाके अरमान बुझिक
बाट जोहैछी हम अनुरागी अँहु त अबिते हायब

सुधा मिश्र
जनकपुर -४
धनुषा ,नेपाल

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